पृथ्वी के धुवीय क्षेत्रो जैसे अलास्का तथा उत्तरी कनाडा के आकाश मे रंगो का अत्यंत वैभवशाली दृश्य दिखाई देता है नृत्य करते हरे गुलाबी रंग एक अदभुत दृश्य प्रस्तुत करते है ये दृश्य जितने मनोहारी है उतने ही रहस्यपूर्ण भी।हमसब जानते है सूर्य ऊर्जा का महान स्रौत है कारण सूर्य पर नाभिकीय संलयन का होना इसके कारण सूर्य से सौर लपटें(solar flair)उठती रहती है ये सौर लपटें विशेष अवधि में अपने चक्र को घटाती और बढ़ाती रहती है क्योकि सूर्य अपने ध्रुव को निश्चित समयअंतराल मे बदलता रहता है।सूर्य से सौर लपटें उठते रहने के कारण ये सौर लपटें पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र(Magnetic Field)मे प्रवेश करती है वास्तव मे सौर लपटे विशाल संख्या मे सूर्य से निकलनेवाली आवेशित इलेक्ट्रान और प्रोटोन है।ये इलेक्ट्रान और प्रोटोन जब पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र मे प्रवेश करती है तो ये पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र मे फँस जाती है और पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षेत्र रेखाओ के साथ-साथ वृताकार पथ पर गति करते हुए पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों के पास पहुँच जाती है।जब कोई आवेशित कण किसी चुम्बकीय क्षेत्र मे गति करता है तो उसपर एक बल लगने लगता है इस बल की दिशा (चुम्बकीय क्षेत्र और आवेशित कण का वेग) दोनो के तल पर लम्ब होती है इसे लोरेंज़ बल(lorenz force)कहते है।अर्थात F=q(V×B)sinθ यहाँ q=कण का आवेश,V=कण का वेग,B= चुम्बकीय क्षेत्र और sinθ= चुम्बकीय क्षेत्र और आवेशित कण के बीच बना कोण है।जबθ=0या180डिग्री होतो लगनेवाला बल शून्य होगा यदिθ=90डिग्री हो तो बल सबसे महत्तम होगा।यदि चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम(Dimension)बहुत ज्यादा होतो आवेशित कण वृताकार पथ पर गति करने लगता है।आप सोच रहे होगे की सौर लपटे(इलेक्ट्रान और प्रोटोन)पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवो के पास ही क्यों आ जाती है ये सौर लपटें ध्रुवों से दूर भी तो जा सकती है इसका कारण है पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की रेखाए चुम्बकीय ध्रुवों पर बहुत पास पास आ जाती है इस कारण पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र ध्रुवों पर ज्यादा शक्तिशाली हो जाता है।इसी कारण से सौर लपटें पृथ्वी के ध्रुवों पर आ जाती है।जब ये आवेशित इलेक्ट्रान और प्रोटोन पृथ्वी के ध्रुवों पर आ जाती है तो ध्रुवो पर आवेश का घनत्व बढ़ जाता है। ये आवेशित कण वायुमंडल के अणुओ एवं परमाणुओ से टकराने लगते है इस कारण आवेशित ऑक्सीजन परमाणु हरा रंग तथा आवेशित नाइट्रोजन परमाणु गुलाबी रंग का प्रकाश उत्सर्जित करने लगता है।इस प्रकार एक अत्यंत अदभुत रंगो की छटा दिखाई देने लगती है मानो सारा आकाश रौशनी से जगमगा उठता है और एक अविश्वसनीय आतिशबाजी का दृश्य दिखाई देता है।भौतिकी मे इस घटना को उत्तर ध्रुवीय ज्योति(Northern Lights)या (Aurora Borealis) कहा जाता है।यह प्राकृतिक आतिशबाजी का दृश्य रात्रि मे ही देखा जा सकता है सूर्य की उपस्थिति मे इसे आप देख नही सकते।सूर्यास्त के बाद पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों मे(अलास्का.उत्तरी कनाडा.आइसलैंड.नॉर्वे) इस प्राकृतिक आतिशबाजी का आप आनंद ले सकते है।
